Monday, February 22, 2010

लौ

उस दिन ठहाको के बीच 
अचानक से नज़र एक लौ पे गयी,
जो हर गूँज के साथ मद्धिम हो रही थी |
शायद उसे अपनी अनदेखी का गुमान था
इसीलये आख़िरी सलाम अदा कर रही थी |


आज वही लौ अपने पूर्ण रूप मे 
मेरे सामने बैठी,
अपनी नज़रअंदाज़ी का हिसाब माँग रही है |
जश्न की क्षणभंगूरता का पाठ पढ़ाते हुए
एक बार फिर मेरे पर नया एहसान कर रही है |

Saturday, February 13, 2010

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Is sab ke baad bhi GPL karoge??

Sunday, February 7, 2010

काश

काश तुमने मुझे उस सहमी मुस्कान के बीच याद किया होता,
तो आज शायद हँसी के गुबार होते |

काश तुमने मुझे उस साजिश मे शामिल किया होता,
तो आज शायद ईंटों के मकान होते |

काश तुमने मुझे उस सोच मे क़ैद किया होता,
तो आज शायद हॉंसले बुलंद होते |

काश तुमने मुझे उस मस्ती के आलम मे परोस लिया होता,
तो आज शायद रस्ते गुलज़ार  होते |

काश तुमने मुझे उस अंधड़ मे ओढ़ लिया होता,
तो आज शायद दामन बेदाग होते |

काश तुमने मुझे उस लगाम से कसकर जकड़ लिया होता,
तो आज शायद सुकून पे सवार होते |


काश तुम मुझे कभी अपना पाते,
तो आज शायद अपने गुनहगार ना होते |