गरज के साथ बूंदे पड़ने का पूरा अनुमान था| बादल गरजे, जोर जोर से, लेकिन बरसे नहीं| ऐसा लगा
जैसे चेतावनी देने आये थे| लेकिन किसको? मुझे? या मेरे बाजू वाले को? शायद सवारी ले जाने
से मना करने वाले ऑटो वाले को, या फिर सिग्नल पे पैसे मांगते भिखारी को|
जैसे चेतावनी देने आये थे| लेकिन किसको? मुझे? या मेरे बाजू वाले को? शायद सवारी ले जाने
से मना करने वाले ऑटो वाले को, या फिर सिग्नल पे पैसे मांगते भिखारी को|
मेरे हिसाब से इसकी तफ्तीश के लिए एक कमिटी बनायीं जानी चाहिए, जो इस मामले की तह
तक जाके पता लगाए के कौन है जो बादलो को उकसा रहा है? शुक्र है के आज बादलो ने खाली
चेतावनी दी है, अगर बरस जाते तो इस शहर की सड़के दो मिनट में गटर बन जाती और शाम में
घर पहुंचना एक साहसिक मिशन|
तक जाके पता लगाए के कौन है जो बादलो को उकसा रहा है? शुक्र है के आज बादलो ने खाली
चेतावनी दी है, अगर बरस जाते तो इस शहर की सड़के दो मिनट में गटर बन जाती और शाम में
घर पहुंचना एक साहसिक मिशन|
लेकिन इस छोटी सी बात के लिए कमिटी बनाना शायद जायज़ न होगा| लोग सवाल करेंगे|
आम आदमी के टैक्स का पैसा अगर इन सब बेमतलब की चीज़ो पे खर्च होगा तो जनता बगावत
कर सकती है और अराजकता का माहौल पैदा हो सकता है|
सरकारे पलट सकती है और दुनिया बदल सकती है|
आम आदमी के टैक्स का पैसा अगर इन सब बेमतलब की चीज़ो पे खर्च होगा तो जनता बगावत
कर सकती है और अराजकता का माहौल पैदा हो सकता है|
सरकारे पलट सकती है और दुनिया बदल सकती है|
मैं यह सब सोचता हुआ चला जा रहा था के पीछे से भारी भरकम आवाज़ आयी “भाई साब,
सिगरेट फ्री की नहीं है| पैसे देके जाओ|” यह पान वाले की बगावत थी मेरे खिलाफ|
मैंने दबी सी आवाज़ में सॉरी बोला और हलकी सी मुस्कान के साथ पैसे दिए|
कोई आक्रोश का सैलाब नहीं उमड़ा और मेरी सलतनत कायम रही|
सिगरेट फ्री की नहीं है| पैसे देके जाओ|” यह पान वाले की बगावत थी मेरे खिलाफ|
मैंने दबी सी आवाज़ में सॉरी बोला और हलकी सी मुस्कान के साथ पैसे दिए|
कोई आक्रोश का सैलाब नहीं उमड़ा और मेरी सलतनत कायम रही|