कभी 5, कभी 10, कभी आधे घंटे का काम होता है,
अरे छोड़िए हज़ूर, इतना छोटा काम भी भला कोई काम होता है|
लग गये है घंटो, लेकिन काम अभी अधूरा है,
पर आपका हर कॉल के साथ समर्थन पूरा है|
रिश्ता ही कुछ ऐसा है के याद जाती नही हमारी,
शनिवार हो या इतवार, घंटी बजती रहती है हमारी|
अजी प्यार है पूरा, हमे पता है|
मगर दारू के नशे मे ये बंदा भी तो पड़ा है|
ज़रा सोचिए, ज़रा समझिए इसने कल रात क्या किया है?
पिता जी पड़ाते थे बचपन मे,
काम ही कर्म और कर्म ही पूजा है|
अब वही पूछते है हमसे
कैसा ये कर्म, कैसी ये पूजा है?
रहते हो तुम बिज़ी हर वक़्त काम मे,
सच बताना मुझको
कॉल किसी लड़की या सही मे बॉस का आता है?
अब क्या बतायें इनको और क्या समझायें?
काम तो फुर्ती से करते है,
मगर समय व्यतीत करना पड़ जाता है|
हम चाहे ना चाहे, हर बार काम आ ही जाता है|