उसने चाँद को निहाराते हुए
सिगरेट का एक कश लगाया|
कठोर चेहरे पर एक सुकून था,
मानो कि चाँद को दिन भर का हिसाब दे रहा हो|
उसकी सेज फूलों की नही बल्कि
कठोर थी
और हवा मे खुश्बू नही
कूड़े की सड़न थी|
Street Lamp की रोशनी उसके
चेहरे को जगमग कर रही थी|
लेकिन वो बेपरवाह होके
चाँद से नज़रे मिला रहा था|
सिगरेट के कश लगा रहा था|
तभी एक गाड़ी ज़ोर से Horn बजाती
सड़क से गुज़री,
दूर कही किसी ने किसी को गाली दी,
मैने आँख उठा उस ओर देखा,
लेकिन इस सब से अंजान
वो अपनी रेहडी पर पड़ा
चाँद को निहारता रहा
सिगरेट के काश लगाता रहा|
No comments:
Post a Comment